भारी वर्षा से बेहाल किसान – खेतों में डूबी मेहनत, आंखों में आंसू
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🌾 भारी वर्षा से बेहाल किसान – खेतों में डूबी मेहनत, आंखों में आंसू
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🌾 भारी वर्षा से बेहाल किसान – खेतों में डूबी मेहनत, आंखों में आंसू
रिपोर्ट: भारी वर्षा ने उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में तबाही मचा दी है।
जहाँ एक ओर शहरों में पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ, वहीं गाँवों में किसानों की जिंदगी ही डूब गई है।
किसानों का कहना है कि लगातार हुई भारी बारिश से न केवल धान की फसल नष्ट हुई है बल्कि अब आलू की बुवाई भी कठिन हो गई है। खेतों में जलभराव के कारण मिट्टी गीली और असंतुलित हो गई है, जिससे आलू के लिए खेत तैयार करना लगभग असंभव हो गया है।और जो आलू बो दिए गए वो अब सड़ जाएंगे पानी में ही।
“धान कटने से पहले ही पानी ने सब बर्बाद कर दिया... अब न धान बचा, न आलू का खेत,” — एक किसान की यह बात सुनते ही आसपास सन्नाटा छा गया।
खेती, जो पहले ही महंगी हो चुकी है, अब मौसम की मार से और भी कठिन हो गई है। किसान फसल के साथ-साथ अपनी मेहनत, अपने सपने और अपने भविष्य को डूबते हुए देख रहे हैं।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है और प्रभावित किसानों को राहत राशि दी जाएगी। लेकिन गाँव के किसान कहते हैं कि “राहत कागज़ों पर आती है, खेतों तक नहीं।”
🌧️ निष्कर्ष
सरकार ने जिस तरह हर घर नल से जल के पहुंच को आसान बनाया। उसी तरह गांवो से पानी के निकास के प्रबंधन पर जोर देने की आवश्यकता है।
भारी वर्षा केवल फसलें नहीं बहाती, यह किसानों की उम्मीदों, उनके भविष्य और उनके परिवार की रोज़ी-रोटी को भी बहा ले जाती है। अब ज़रूरत है कि सरकार और समाज दोनों मिलकर इन मिलकर इन मेहनतकश किसानों को राहत और स्थायी समाधान प्रदान करें। मेहनतकश किसानों को राहत और स्थायी समाधान प्रदान करें।
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