Manyavar Kanshiram ji ke anmol vichar

 



बहुजन समाज पार्टी (BSP) के संस्थापक कांशीराम जी के कई प्रसिद्ध वचन (सिद्धांत) हैं, जिन पर पूरी पार्टी और उनका आंदोलन आधारित है। नीचे उनके कुछ प्रमुख पुराने सिद्धांत और विचार (Old vachan/siddhant) दिए गए हैं 👇


🔹 कांशीराम जी के प्रमुख सिद्धांत और वचन

“जो जितना पीड़ित है, वह उतना ही संघर्ष करेगा।”

👉 उनका मानना था कि समाज में जो वर्ग सबसे अधिक शोषित है, वही सबसे अधिक परिवर्तन की ताकत रखता है।


“बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय।”

👉 यह BSP का मूल मंत्र है — बहुसंख्यक समाज के हित और सुख के लिए काम करना।


“राजनीतिक शक्ति ही समाज का मास्टर की है।”

👉 उनका कहना था कि जब तक राजनीतिक शक्ति अपने हाथ में नहीं होगी, तब तक सामाजिक और आर्थिक समानता संभव नहीं है।


“हम वोट बेचेंगे नहीं, हक लेंगे।”

👉 यह उनका आंदोलनकारी नारा था, जो बहुजन समाज को जागरूक करने के लिए दिया गया।


“हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं, व्यवस्था से है।”

👉 उनका संघर्ष जाति आधारित सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ था, किसी व्यक्ति या जाति विशेष के नहीं।


“शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो।”

👉 डॉ. भीमराव आंबेडकर के इस नारे को उन्होंने अपने आंदोलन का आधार बनाया।


“जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी।”

👉 यह उनका सामाजिक-राजनीतिक गणित था, जिससे वे बहुजन समाज को एकजुट करने का संदेश देते थे।


“सत्ता की चाबी हमारे हाथ में होनी चाहिए।”

👉 उनका मानना था कि जब तक बहुजन वर्ग शासन नहीं करेगा, तब तक वास्तविक परिवर्तन नहीं होगा।


“बहुजन समाज की एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।”

👉 समाज को संगठित रखना उनके विचारों का केंद्र बिंदु था।

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